श्री ओंकारेश्वर मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का तीसरा दिन श्रद्धा व भक्ति के साथ संपन्न
श्री ओंकारेश्वर मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का तीसरा दिन श्रद्धा व भक्ति के साथ संपन्न
हिंदुस्तान समाचार जगदलपुर:- मैत्री संघ मार्ग स्थित श्री ओंकारेश्वर मंदिर में आयोजित पांच दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन गुरुवार सुबह नित्य पूजन विधिविधान से संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष एवं महापौर संजय पाण्डेय सपत्नी पूजन में सम्मिलित हुए।
इसके पश्चात मंदिर में विराजित पूर्व विग्रह एवं श्रीराम परिवार के नूतन विग्रहों का महास्नान मंडप में विधिविधान से संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धानुसार दूध, दही, शहद, फल रस, गन्ने का रस आदि सामग्री अर्पित कर भावपूर्वक देवताओं का अभिषेक एवं स्नान कराया।
तत्पश्चात मंदिर प्रांगण से भव्य शोभायात्रा निकाली गई जो कि वार्ड के मुख्य मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर प्रांगण पहुंची। इसके बाद रत्न गर्भ प्रतिष्ठा एवं शिखर कलश स्थापना कार्यक्रम में श्रद्धालुगण शामिल हुए। मंदिर के शिखर (गुंबद) में धान्य लक्ष्मी की पूजा के साथ धान्य एवं रत्न धातु तथा पूर्व में वनयाग पूजन कर लाई गई सहाड़ा काष्ठ से निर्मित इंद्र एवं शची की प्रतिमा की स्थापना की गई। श्रद्धालुओं द्वारा स्वेच्छा से धान, पंचरत्न, तांबे के सिक्के, स्वर्ण, चांदी एवं अपनी शक्ति व श्रद्धा अनुसार सामग्री अर्पित की गई, जिसे शिखर में स्थापित किया गया। संध्या आरती के पश्चात कार्यक्रम का समापन हुआ।
मंडप में देवताओं के महास्नान के दौरान वैदिक आचार्य ने इंद्रावती नदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इंद्रावती हमारे सुख-दुख की साथी है। भगवती इंद्रावती ही हमारे लिए गंगा स्वरूप है। इसी इंद्रावती के जल से हम बड़े हुए हैं और यही जीवन वाहिनी हमें पीने योग्य जल प्रदान करती है। समस्त मांगलिक कार्यों में कलश यात्रा के माध्यम से इंद्रावती का जल लाकर यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ किए जाते हैं। सुख-दुख के अवसरों पर स्नान एवं अस्थि विसर्जन भी इंद्रावती में किया जाता है। अतः हमारा परम कर्तव्य है कि हम भगवती इंद्रावती को स्वच्छ रखें एवं किसी भी प्रकार का प्लास्टिक अथवा कचरा नदी में न फेंकें। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने इंद्रावती नदी को स्वच्छ रखने एवं गंदगी न करने का संकल्प लिया।
नित्य पूजन एवं अनुष्ठान आचार्य रोमित राज त्रिपाठी, आचार्य शिव मिश्रा, आचार्य मानस रंजन दास, आचार्य हेमंत शर्मा, पंडित चंदन तिवारी, पंडित शुभंकर मिश्रा, पंडित मृत्युंजय, पंडित अर्जुन मिश्रा, पंडित श्री तापस द्वारा मंत्रोच्चार के साथ विधिवत संपन्न कराया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वार्डवासी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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